Skip to content
Astrostories Logo Astro Stories

  • आरती संग्रह
        • एकादशी माता की आरती
        • गणेश जी की आरती
        • खाटू श्याम जी की आरती
        • एकादशी माता की आरती
        • हनुमान जी  की आरती
        • काली माता की आरती
        • खाटू श्याम जी की आरती
        • भगवान जगदीश जी की आरती
        • माँ गंगा आरती
        • ब्रहस्पति देव की आरती
        • काली माता की आरती
        • साईं बाबा आरती
        • श्री सत्यनारायण आरती
        • शिव आरती
        • माँ दुर्गा आरती
        • आरती कुंज बिहारी की
        • श्री बांके बिहारी की आरती
        • श्री लक्ष्मी जी की आरती
        • गणेश जी की आरती
  • चालीसा
        • शनि चालीसा
        • श्री लक्ष्मी चालीसा
        • श्री कृष्ण चालीसा
        • हनुमान चालीसा
        • श्री कुबेर चालीसा
        • श्री राधा चालीसा
        • श्री गणेश चालीसा
        • शिव चालीसा
        • श्री विष्णु चालीसा
        • श्री दुर्गा चालीसा
  • कथा
        • सावन सोमवार व्रत कथा
        • सोमवार व्रत कथा
        • मंगलवार व्रत कथा
        • बुधवार व्रत कथा
        • रविवार व्रत कथा
        • अधिक मास की कथा
        • कार्तिक मास की कथा
        • साई बाबा व्रत कथा
        • करवा चौथ कथा
        • जितिया व्रत कथा
        • शनिवार व्रत कथा
        • प्रदोष व्रत कथाये
          • सोम प्रदोष व्रत कथा
          • मंगल प्रदोष व्रत कथा
          • बुध प्रदोष व्रत कथा
          • गुरु प्रदोष व्रत कथा
          • शुक्र प्रदोष व्रत कथा
          • शनि प्रदोष व्रत कथा
          • रवि प्रदोष व्रत कथा
        • वैभव लक्ष्मी व्रत कथा
  • व्रत
        • सोमवार व्रत
        • मंगलवार व्रत
        • बृहस्पतिवार व्रत
        • रविवार व्रत
        • साई बाबा व्रत
        • प्रदोष व्रत
        • बुधवार व्रत कथा
        • शीतला अष्टमी
        • नवरात्रि व्रत
          • नवरात्रि का पहला दिन
          • नवरात्रि का दूसरा दिन
          • नवरात्रि का तीसरा दिन
          • नवरात्रि का चौथा दिन
          • नवरात्रि का पाचवा दिन
          • नवरात्रि का छठा दिन
          • नवरात्रि का सातवा दिन
          • नवरात्रि का आठवा दिन
          • नवरात्रि का नौवा दिन
        • शनिवार व्रत
        • एकादशी व्रत
          • वरुथनी एकादशी
          • सफला एकादशी
          • पापमोचिनी एकादशी
          • आमलकी एकादशी
          • निर्जला एकादशी
          • कामिका एकादशी
          • देवशयनी एकादशी
          • परिवर्तिनी एकादशी
          • अजा एकादशी
          • श्रावण पुत्रदा एकादशी
          • विजया एकादशी
          • मोहिनी एकादशी
          • मोक्षदा एकादशी
          • पापांकुशा एकादशी
          • देवुत्थान एकादशी
          • परिवर्तिनी एकादशी
          • षटतिला एकादशी
          • उत्पन्ना एकादशी
        • सावन शिवरात्रि
  • धार्मिक स्थल
        • गुरुजी बड़े मंदिर
        • वैष्णो देवी
        • कैंची धाम
        • शिव खोड़ी मंदिर
        • मेहंदीपुर बालाजी मंदिर
        • मथुरा
        • वृंदावन
        • कामाख्या मंदिर कैसे जाए
        • सिद्धिविनायक मंदिर
        • कालकाजी मंदिर
        • अमरनाथ यात्रा
        • द्वारकाधीश मंदिर
        • रामेश्वरम मंदिर
        • कोणार्क सूर्य मंदिर
        • प्रेम मंदिर
        • बाँके बिहारी मंदिर
        • तिरुपति बालाजी मंदिर कैसे जाएं
        • शिर्डी साई बाबा मंदिर कैसे जाए ?
        • मीनाक्षी मंदिर
  • मंत्र
        • माँ लक्ष्मी मंत्र
        • शिव मंत्र
        • कुबेर मंत्र
        • गायत्री मंत्र
        • बगलामुखी मंत्र
        • महाकाली मंत्र
        • शनि मंत्र | Shani Mantra
  • स्तोत्रम्:
        • गणेश स्रोतम
        • राम रक्षा स्तोत्रम्:
  • जानकारी
        • तापमान
          • वैष्णो देवी तापमान
          • कैंची धाम तापमान
        • तिथि
          • अमावस्या तिथि 2024
          • पूर्णिमा तिथि 2024
          • सावन 2024
          • नवरात्रि 2024
          • एकादशी 2024
  • पर्व
        • रथ यात्रा
        • गुड़ी पाड़वा
        • गणेश चतुर्थी
        • छठ पूजा
        • भाई दूज
        • महावीर जयंती
        • रक्षाबंधन
        • विश्वकर्मा पूजा
        • गोवर्धन पूजा
        • कुम्भ मेला
        • हरियाली तीज
        • सागा दावा त्योहार सिक्किम
        • तुलसी विवाह
        • काली पूजा
        • हरतालिका तीज
        • बसंत पंचमी
        • नाग पंचमी
        • गुरु पूर्णिमा
        • संकष्टी चतुर्थी
        • धनतेरस
        • मकर संक्रांति
        • दुर्गा पूजा
  • अन्य
        • गुरुजी का सत्संग
        • मथुरा और वृंदावन की दूरी
        • कैंची धाम कैसे पहुंचे- कैंची धाम दूरी
        • सुंदरकांड पाठ
        • बजरंग बाण
        • जीवन परिचय
          • नीब कारोरी बाबा
          • गुरुजी निर्मल सिंह महाराज
        • मेहंदीपुर बालाजी मंदिर दूरी
        • वैष्णो देवी
        • दिल्ली से गंगोत्री दूरी
  • ग्रह दोष
        • विष दोष
        • पितृ दोष
        • केमद्रुम दोष
        • कालसर्प दोष 
        • नाड़ी दोष
        • सूर्य ग्रहण
        • केतु का विभिन्न भावों में प्रभाव
        • गुरु चांडाल योग
        • राहु महादशा
        • शनि की साढ़े साती
          • जानिए शनि की साढ़े साती किस राशि पर है – 2024 और 2025 मे
  • अंक ज्योतिष
        • 1 से 9 तक
        • 1 अंक ज्योतिष
        • 2 अंक ज्योतिष
        • 3 अंक ज्योतिष
        • 4 अंक ज्योतिष
        • 5 अंक ज्योतिष
        • 6 अंक ज्योतिष
  • Contact Us
  • News
Astrostories Logo
Astro Stories

Dasha Mata Ki Katha
May 30, 2024July 17, 2025

दशा माता की कथा | Dasha Mata Ki Katha

दशा माता, माँ पार्वती का एक स्वरूप हैं। इनकी पूजा से घर में सुख-शांति और धन-धान्य की वृद्धि होती है। लोग चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को दशा माता की आराधना करते हैं।

कथा | Katha

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक राजा नल अपनी रानी दमयन्ती और अपने 2 पुत्रों के साथ अपने राज्य में सुखपूर्वक राज्य करते थे। एक बार एक बूढ़ी महिला ब्राह्मणी राजमहल में आई, और रानी दमयन्ती से कच्चे सूत का डोरा खरीदने का आग्रह किया।

तभी रानी की दासी ने कहा, महारानी आज दशा माता के व्रत एवं पूजा का दिन है। आज के दिन सभी सुहागिन औरते दशा माता की पूजा पीपल वृक्ष के नीचे करके, इस धागे को धारण करती है।   

यह सुन रानी दमयन्ती ने कच्चे सूत को ले लिया, और विधि – विधान पूर्वक दशा माता की पूजा की। एक दिन राजा नल और रानी दमयन्ती बात कर रहे थे, तभी राजा की नजर दमयन्ती के गले में पड़ी डोरे पर पड़ी।

उन्होंने रानी से कहा आप के पास इतने जेवर है, तब भी आपने एक सामान्य से दिखने वाले धागे को पहन रखा है। रानी राजा को जवाब देती, उसके पहले ही राजा ने उसके गले से धागा  जमीन पर फेक दिया।

यह देख रानी ने राजा से बोला यह दशा माता के पूजा का धागा है, इसे तोड़ने से हमसे दशा माता नाराज हो जाएगी।

उसी रात्रि को राजा नल को रात्रि में स्वप्न में एक बूढ़ी औरत और उसने बोली “हे राजा नल तूने मेरा धागा फेक के मेरा अपमान किया है, अब तेरा नाश होगा और तेरा सब धन धान्य नष्ट हो जाएगा”।

इतना कहकर बूढ़ी महिला (दशा माता) गायब हो गई। समय बीतता रहा और एक वह समय या ही गया जब राजा का सब धन धान्य, हाथी घोड़े नष्ट हो गए और राजा रानी 2 वक्त की रोटी पाने के लिए जूझ रहे थे।

एक दिन राजा ने रानी से कहा रानी तुम दोनों बच्चों को लेकर अपने मायके चली जाओ, वहा तुम सुखपूर्वक रह सकोगी। राजा की बात सुनकर रानी ने कहा, मै आपकी पत्नी हु आप जिस हालत में रहेंगे मै भी रहूँगी, चाहे वह सुख हो या दुख।

यह सुन राजा ने यह निर्णय लिया की वो अपने बच्चों को लेकर अपना देश छोड़कर चले जाएंगे, और जहां भी काम मिलेगा वह कर के अपना जीवन यापन करेंगे।

रानी ने राजा की बात माँ लिया और दोनों ने अपने पुत्र को लेकर अपना देश छोड़ दिया। चलते चलते रास्ते में राजा भील का राज्य पड़ा, वहाँ उन्होंने राजा भील से अपने दोनों पुत्रों को कुछ समय तक अमानत के तौर पर रखने की सहायता मांगी।

राजा भील नल दमयन्ती की बात मान गए, और उनके दोनों पुत्रों को अपने यहाँ महल में रख लिया। अब नल और दमयन्ती फिर से काम की खोज में निकल पड़े रास्ते में राजा नल के मित्र का घर पड़ा।

तब राजा नल ने दमयन्ती से आग्रह किया की, चलो आज की रात्रि मेरे मित्र के यहाँ ठहरते और विश्राम करते है। नल और दमयन्ती को देखकर उनका मित्र बहुत प्रसन्न हुआ, और उसने अपने मित्र के ठहरने की व्यवस्था की। 

रात्रि में जब नल और दमयन्ती ने भोजन ग्रहण करके सोने गए, तो अचानक उन्होंने देखा की  मित्र की पत्नी का खूंटी पर हार टंगा था, जो उनके देखते ही देखते बेजान खूंटी हीरो का हार निगल रही थी।

यह सोच की उनका मित्र क्या सोचेगा, हीरो के हार के बारे में जब उसे सुबह नहीं दिखेगा तो। यह सोच राजा रानी ने निर्णय लिया की वो रात्रि को ही निकल जाएंगे, मित्र के घर से बिना बताए।

अब नल और दमयन्ती रात्रि को अपने मित्र के घर से निकल पड़े। सुबह होते ही राजा के मित्र और उसकी पत्नी ने देखा, की हार वहाँ नहीं तो वह अचंभित हो गए। राजा नल के मित्र की पत्नी ने नल और दमयन्ती को बुरा भला बोलने लगी, और चोरी का इल्जाम लगा रही थी।

लेकिन नल के मित्र को नल पर पूर्ण भरोसा था, उसने बोला की धैर्य रखो हार मिल जाएगा।  और मेरा मित्र चोर नहीं हो सकता है, उसे चोर मत बोलो।

आगे जाने पर राजा नल के बहन का घर पड़ रहा था। राजा ने अपनी बहन के घर संदेश भेजवाया की तुम्हरे भाई – भाभी आये है, उनसे मिलने आओ। बहन ने संदेश देने वाले व्यक्ति से भाई भाभी के हाल चाल पूछा, और कैसे आये है, ये भी पूछा।

संदेश देने वाले व्यक्ति ने बता दिया पैदल आये है, और उनकी हालत काफी खराब है। यह सन  बहन मिलने तो आई, और अपने भाई भाभी के लिए कांदा और रोटी ले आई।

राजा नल ने बहन द्वारा दिए कांदा और रोटी को ग्रहण कर लिया, लेकिन दमयन्ती ने अपना कांदा रोटी जमीन में गड्ढा कर के रख दिया। बहन से मिलकर अब नल और दमयन्ती आगे बढ़े।  

चलते चलते रास्ते में एक नदी पड़ी। राजा ने नदी से मछली पकड़ी और रानी से बोला आप इसे भुजिए मै गाव से परोसने के लिए पात्र लेकर आता हु। राजा गाव में गया, और वहाँ देखा गाव का सेठ सभी को भोजन कर रहा था।

राजा ने सेठ के यहाँ से भोजन लिया, और वहाँ से चल पड़ा। रास्ते में आ ही रहा था, की एक चील ने झपट्टा मार के सारा भोजन गिरा दिया। यह देख राजा ने सोचा की अब रानी क्या सोचेगी की मै पात्र लेकर आया हु, भोजन अकेले ही ग्रहण कर गया।

इधर रानी दमयन्ती ने मछली को भुजने गई तो मछली जिंदा थी और वह फिसल कर पानी में पुनः चली गई, और रानी सोचने लगी की राजा क्या सोचेंगे की सारा भोजन खुद ही ग्रहण कर गई।

यही सोच रही थी की तभी राजा आ गए। रानी कुछ राजा से बोलती राजा देख कर समझ गए। राजा रानी अब पुनः काम की तलाश में निकल पड़े। चलते – चलते रास्ते में रानी दमयन्ती का मायका पड़ा।

तब राजा ने रानी से बोला रानी तुम अपने मायके चली जाओ और राजमहल में किसी दासी का काम कर लेना, और मै भी यही आस पास कोई काम देख लूँगा। रानी ने राजा की बात मान  लिया और वह राजमहल में दासी का काम करने लगी।

तथा राजा ने पास ही एक किराने की दुकान तेली का काम कर लिया। समय बीतता गया और  कुछ दिन बाद होली दशा का दिन आया। इस दिन सभी रानियों ने व्रत रखने के लिए स्नान किया और तैयार होने मे दासी ने मदद किया। यह व्रत दासी दमयन्ती ने भी रखा था।

व्रत करने के लिए दमयन्ती तैयार होने लगी। तभी राजमाता ने कहा तुम भी व्रत हो आओ मै तुमहरी सह्यता कर दु तुम्हरे बाल बांध दु। यह कह कर राजमाता दासी के बाल बांधने लगी तभी उन्होंने दासी के सिर में चिन्ह देखा और रोने लगी।

उन्हे रोता देखकर दासी ने पूछा की आप क्यू रो रही है? तब राजमाता ने जवाब दिया जैसे तुम्हारे sir में चिन्ह है वैसे ही मेरी पुत्री दमयन्ती के सिर में भी था, पता नहीं कहाँ है कैसे है उसकी हाल खबर नहीं मिल पा रही है।

तब दासी ने जवाब दिया मै ही आपकी पुत्री दमयन्ती हु, मुझे पर दशा माता नाराज है इसीलिए यह सब सहना पद रहा है। आज दशा माता का व्रत और पूजा करूंगी तो माता माफ कर देगी और सब ठीक हो जाएगा।

तब राजमाता ने पूछा तुम्हरे पति कहा है, और कैसे है? रानी ने बोल यही इसी राज्य में एक टेली के रूप में काम कर रहे है। यह सुन राजमाता ने सैनिकों को आदेश दिया की दमयन्ती के पति को ढूंढा जाए और उन्हे सम्मान पूर्वक लाया जाए।

रानी दमयन्ती ने दशा माता की विधि विधान से पूजा और व्रत किया, और धागा पहन लिया। इधर सैनिकों ने राजा नल को ढूंढ कर सम्मानपूर्वक ले आये। राजा को देखरकर रानी अत्यंत प्रसन्न हो गई।

धीरे धीरे सब कुछ ठीक हो गया और राजा ने अपने राज्य को वापस जाने के लिए अपने सास ससुर से बोला। राजा के सास ससुर ने पुत्री को ढेर सारे उपहार, जेवर, हाथी, घोडा आदि देकर विदा कर दिया।

राजा रानी चलते – चलते पुनः उसी जगह पर जा पहुंचे, जहां उनके साथ मछली और चील की घटना घटी थी। उस घटना को याद कर राजा रानी ने उस समय में हुई घटना को बताया की मछली जीवित थी पानी में चली गई थी, और चील ने झपट्टा मार के भोजन गिरा दिया था।

आगे बढ़ने पर राजा की बहन का घर पड़ा। राजा ने अपनी बहन के घर पुनः संदेश भिजवाया की भाई भाभी आये है आकर मिल ले। समाचार देने वाले व्यक्ति से राजा की बहन ने भाई भाभी का हाल चाल पूछा। व्यक्ति ने बोला की हाथी- घोड़े और बहुत सारे सैनिकों के साथ आये है।

यह सुन राजा की बहन ने सोने की थाल सजा कर के भाई भाभी से मिलने गई। राजा की बहन को देखकर रानी दमयन्ती ने उस समय के जमीन में गाड़े कांदा और रोटी ती दोनों जमी से सोने के बन के निकले, उन्होंने राजा की बहन को दे दिया।

अब वह अपने मित्र के यहाँ गए जहां खूंटी ने हार निगल लिया था। राजा को आता देखर मित्र ने फिर से सेवा सत्कार किया और रात्री में विश्राम को रुके। रात्री को जिस कमरे में नल दमयन्ती रुके थे यह वही कमरा था जो रात्रि को खूंटी ने हार निगल लिया था।

आधी रात्री मे नल दमयन्ती ने देखा की खूंटी हार उगल रही है तभी राजा ने अपने मित्र तथा उसकी पत्नी को बुलाकर दिखया की उस समय हमने नहीं लिया हार खूंटी ने निगल लिया था, तुम लोग क्या सोचोगे हमारे बारे में इसीलिए हम चले गए यहाँ से।

यह सब देख राजा के मित्र और उसकी पत्नी को अपनी गलती का एहसास हुआ। अब राजा रानी अपने मित्र से विदा लेकर राजा भील के यहाँ पहुचे और अपने पुत्र को मांग पर राजा भील ने देने से माना कर दिया।

परंतु राजा रानी ने हार नहीं मानी, और उन्होंने हाथ जोड़कर दशा माता से प्रार्थना की माता हमारे पुत्रों को हमे दिला दो। राजा रानी की सहायता करने गाव वाले आये और राज्य भील को उनके पुत्रों को वापस करना पड़ा।

अपने पुत्रों को लेकर राजा रानी अपने देश पहुचे। राजा रानी को देखकर सभी नगर के लोग खुश हुए और उन्होंने स्वागत किया। अब राजा रानी को दशा माता की कृपया से अपना राज पाठ पुनः मिल गया। और अब सुख – शांति से राज्य करने लगे।

कथा Dasha Mata Ki Katha

Post navigation

Previous post
Next post

Recent Posts

  • होली 2025
  • पशुपतिनाथ मंदिर, नेपाल | Pashupatinath Temple Nepal
  • रुद्रनाथ मंदिर (पंच केदार)
  • मध्यमहेश्वर महादेव मंदिर | Madhyamaheshwar Mahadev Temple
  • कल्पेश्वर मंदिर | Kalpeshwar Temple

Recent Comments

No comments to show.

Archives

  • March 2025
  • February 2025
  • January 2025
  • December 2024
  • November 2024
  • October 2024
  • September 2024
  • August 2024
  • July 2024
  • June 2024
  • May 2024
  • April 2024
  • March 2024
  • February 2024
  • January 2024
  • December 2023
  • November 2023

Categories

  • अंक ज्योतिष
  • अन्य
  • आरती संग्रह
  • कथा
  • ग्रह दोष
  • चालीसा
  • तापमान
  • तिथि
  • पर्व
  • बजरंग बाण
  • मंत्र
  • मंदिर
  • व्रत
  • सुंदरकांड पाठ
  • स्तोत्रम्:

Useful Links

  • About Us
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
  • Return and Refund Policy
  • Terms & Conditions

Text Footer Link

©2026 Astro Stories | WordPress Theme by SuperbThemes