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प्रदोष व्रत
February 3, 2024July 17, 2025

प्रदोष व्रत | Pradosh Vrat

हिन्दू धर्म में शिव भक्तों के लिए प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।  

  • यह हर माह की त्रयोदशी के शुक्ल पक्ष एवम कृष्ण पक्ष में आता है।
  • यह व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से प्रारंभ कर सकते है।    
  • सूर्यास्त के बाद तथा रात के पूर्व के समय को प्रदोष काल कहते है।
  • प्रदोष व्रत में सूर्यास्त से 35 से 40 मिनट पहले ओर सूर्यास्त के 35 से 40 मिनट बाद(प्रदोष काल) तक भगवान शिव की पूजा की जाती है।
  • एक साल में 24 प्रदोष व्रत पड़ते है। यह व्रत शिव भक्तों के लिए अत्यंत प्रिय है।
  • इस व्रत को करने वाले व्यक्ति को 100 गाय दान करने का फल मिलता है।
  • हिन्दू पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि माह के दोनों पक्ष में आती है, (शुक्ल पक्ष एवम कृष्ण पक्ष ) तथा यह तिथि हफ्ते के किसी भी दिन हो सकती है।
  • प्रदोष व्रत सप्ताह के जिस भी दिन पड़ता है ,वह उसी प्रकार से कहलाता है। जैसे की सोम प्रदोष , मंगल प्रदोष तथा अन्य।
  • अलग-अलग दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत के विभिन्न लाभ है, जैसे की सोमवार को प्रदोष व्रत पड़ने पर आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।   
  • प्रदोष व्रत को व्यक्ति को कम से कम 11 तथा अधिकतम 26 बार रखना चाहिए।

प्रदोष व्रत पूजा सामग्री

फूल, सफेद मिठाई, भांग, अगरबत्ती, आक के फूल, धतूरा, मोली, धूपबत्ती, अबीर, 5 प्रकार के मौसमी फल, कपूर, गाय का दूध, घी, शक्कर, पंचामृत अक्षत,।

प्रदोष व्रत विधि

  • सर्वप्रथम सुबह उठकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करे तथा उसके बाद स्वच्छ वस्त्र धरण करे।
  • इसके पश्चात मंदिर में जा कर शिवलिंग का जलाभिषेक या घर मे पूजन करे।
  • मंदिर में भगवान के आगे दीप व धूप जलाए और फूल अर्पित करे।  
  • इसके बाद भोलेनाथ को वस्तुये जैसे की रोली, चावल, मोली, 5 तरह के फल, धतूरा और बेलपत्र, अर्पित करे।
  • दीप जलाते समय इस मंत्र का उच्चारण जरूर करे – मंत्र – “शुभं करोति कल्यानं,आरोग्यम धन संपादम, शत्रु बुद्धि विनाशाय, दीप ज्योति नामोस्तुते”।। 
  • सप्ताह के दिन मे पड़ने वाले प्रदोष व्रत कथा का पाठ करे एव भगवान शिव की आरती करे।
  • पूरे दिन उपवास रखने के पश्चात सूर्यास्त से थोड़ी देर पहले इच्छानुसार दोबारा स्नान कर शाम की पूजा कर सकते है।
  • प्रदोष काल में ही उत्तर पूर्व दिशा में मुह करके आसन पर बैठ जाए तथा भगवान को धूप पुष्प अर्पित करे भगवान को भोग लगाए।     

रवि प्रदोष व्रत कथा

सोम प्रदोष व्रत कथा

मंगल प्रदोष व्रत कथा

बुध प्रदोष व्रत कथा

गुरु प्रदोष व्रत कथा

शुक्र प्रदोष व्रत कथा

शनि प्रदोष व्रत कथा

प्रदोष व्रत में क्या खाया जा सकता है

  • सुबह की पूजा के बाद इच्छानुसार हल्के फल एवं चाय का सेवन किया जा सकता है।  
  • दिन में प्यास लगने पर अप पानी का सेवन कभी भी कर सकते है।
  • शाम के समय आप सेंधा नामक युक्त आलू के चिप्स का सेवन कर सकते है।
  • व्रत में आप सेंधा नमक का प्रयोग कर सकते है।
  • इस व्रत में फल के सलाद एवम जूस का सेवन भी किया जा सकता है।
  • सूर्यास्त के बाद भगवान शिव की पूजा कर के भोग लगाना है जिसमे:
    • किसी भी तरह के मीठे का भोग एवं सेवन किया जा सकता है।
    • सादी रोटी या सादा पराठा मीठे व्यंजन के साथ जैसे की खीर का भोग लगाए एवं सेवन कर सकते है।  

व्रत में क्या न खाए

  • व्रत में आप लाल मिर्च, चावल, सादा नामक एवम अन्न का सेवन न करे। 
  • व्रत के दिन तामसिक भोजन का प्रयोग न करे।
  • मांसाहारी या मदिरापान से दूर रहे।

प्रदोष व्रत में भोजन कब करना चाहिए (समापन विधि)

व्रत के अगले दिन यानि की चतुर्दशी को भगवान भोलेनाथ की पूजा करने के बाद आप भोजन को ग्रहण कर सकते है।

प्रदोष व्रत से लाभ

  • इस व्रत को करने से जीवन में सुख शांति बनी रहती है तथा आपके संबंधियों से रिस्ते मधुर होते है।  
  • प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति दीर्घायु निरोग एवं स्वस्थ बना रहता है।
  • इस व्रत को करने से भगवान के आशीर्वाद से मनोकामना पूर्ण होती है।
  • भगवान शिव को देवो के देव कहा गया है इसीलिए उनका व्रत और पूजन अत्यंत लाभकारी माना गया है। 
  • प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव शंकर की विशेष कृपा बनी रहती है और सभी कुमार्गी ग्रह आपको अच्छा फल प्रदान करेंगे।
व्रत प्रदोष व्रत

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