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गुरु प्रदोष व्रतकथा
February 6, 2024July 17, 2025

गुरु प्रदोष व्रत कथा | Guru Pradosh Vrat Katha

गुरु प्रदोष का महत्व

  • शास्त्रों के अनुसार गुरु प्रदोष व्रत को करने से आपको 100 गाय के दान का फल प्राप्त होता है।
  • इस व्रत को करने से जीवन में आने वाली कष्टों का नाश होता है।
  • इस व्रत को करने से आपके जीवन में सुख समृद्धि आएगी।

गुरु प्रदोष व्रत कथा | Guru Pradosh Vrat Katha In Hindi

एक बार इन्द्र एवं वृत्तासुर की सेना में युद्ध हुआ। देवताओ ने दैत्य सेना को पराजित कर दिया। यह देख कर वृत्तासुर अत्यंत क्रोधित हुआ और स्वयं युद्ध में युद्ध करने आया। अपनी शैतानी ताकतों के कारण उसने एक विशाल रूप धारण कर लिया।

तथा सभी देवताओ को डराने एवं धमकाने लगा। यह सब देख देवता डर गए और नष्ट होने के डर से भगवान व्रहस्पति के शरण में चले गए। भगवान व्रहस्पति सभी देवताओ में शांत स्वभाव वाले है।

भगवान व्रहस्पति ने देवताओ को शांत किया और वृत्तासुर की मूल कहानी बताने लगे। भगवान व्रहस्पति के अनुसार वृत्तासुर एक तपस्वी था भगवान शिव का भक्त था तथा उसने गंधमंधाव पर्वत पर् तपस्या की और भगवान शिव को प्रसन्न किया।

उस समय में वृत्तासुर एक चित्ररत नाम का राजा था। जो अपने विमान में बैठ कर कैलाश पर्वत जा रहा था और वहा उसने देखा भगवान शिव के बाई ओर माता पार्वती बैठी थी। 

यह देख उसने उपहास उड़ाया। और बोला की मैंने सुन है की मोह माया के कारण हम स्त्रियों के अधीन हो जाते है, वैसे स्त्रियों पर मोहित होना कोई साधारण बात नहीं है। 

लेकिन उसने कभी ऐसा नहीं किया। अपने जनता से भरे दरबार में राजा किसी भी महिला को अपने बराबर नहीं बैठाते है।

इन बातों को सुनकर शिव जी मुस्कुराये ओर बोले दुनिया के बारे में उनके विचार अलग है और उन्होंने दुनिया को बचाने के लिए विष भी पी लिया। वृत्तासुर के उपहास उड़ाने से माता पार्वती क्रोधित हो गई और उन्होंने वृत्तासुर को श्राप दे दिया।

इस श्राप के कारण चित्ररत एक राक्षस के रूप में पृथ्वी पर वापस चला गया। माता पार्वती के श्राप के कारण चित्ररत का जन्म एक राक्षस कुल में जन्म हुआ। वृत्तासुर बचपन से ही शिव का अनुयायी था।

भगवान व्रहस्पति के अनुसार जब तक इन्द्र, भगवान शिव और  माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए व्रहस्पति प्रदोष व्रत का पालन नहीं करता तब तक उसे हराया नहीं जा सकता है।

इन्द्र ने गुरु प्रदोष व्रत का पालन किया और जल्द ही भगवान शिव को प्रसन्न कर दिया। और वृत्तासुर से युद्ध में विजय प्राप्त की, और एक बार फिर से स्वर्गलोक में शांति लौट आई।

अतः जो भी व्यक्ति गुरु प्रदोष व्रत विधिविधान तथा सच्चे मन से करता है उसको फल अवश्य मिलता है। 

पढिए:- बुध प्रदोष व्रत कथा

कथा guru pradosh vrat kathaगुरु प्रदोष व्रतकथा

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