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शिव चालीसा
November 30, 2023July 17, 2025

शिव चालीसा | Shiv Chalisa

शिव चालीसा  मे भगवान शिव की महिमा का गुणगान किया गया है ।

  • शिवरात्रि और प्रत्येक सोमवार को शिव पूजन के साथ शिव चालीसा का जाप भी करना चाहिए ।
  • ऐसा करने से भगवान शिवजी अपने भक्त से प्रसन होते है
  • भक्त पर अपनी कृपादृष्टि करते है, जिससे भक्त के सभी कष्ट दूर होते है
  • भक्त के सभी काम बनने के मार्ग सवय ही खुलने लगते है । 
  • भगवान शिवजी की अतिकृपा के लिए प्रत्येक दिन सुबह स्नान करके शिवजी को जल व पुष्प समर्पित करके शिव चालीसा का जाप करना चाहिए ।

 


शिव चालीसा | Shiv Chalisa

दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥

चौपाई

जय गिरिजा पति दीन दयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके । कानन कुण्डल नागफनी के ॥

अंग गौर शिर गंग बहाये । मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे । छवि को देखि नाग मन मोहे॥

मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए विहाला॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥

मात-पिता भ्राता सब होई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदा हीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। ताके तन नहीं रहै कलेशा॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

दोहा

 नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा। 
 तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥ 
 मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान। 
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥


शिव चालीसा रोजाना नित्य रूप से स्नान करके भगवान शिवजी की आराधना के समय स्तुति करनी चाहिए, ताकि इसका सम्पूर्ण लाभ प्राप्त हो सके । यू तो शिव चालीसा नियमित प्रकार से रोजाना करनी चाहिए, किन्तु कुछ विशेष समय जैसे शिवरात्रि हर सोमवार व सावन मे नियमित रूप से करने से भगवान शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसके नियमित पालन से भक्त को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते है । 

  • भक्त के सभी कष्टों का निवारण होता है।
  • घर भर मे सुख-शांति बनी रहती है।
  • धन धान्य के रास्ते खुलते है।  
  • विशेषकर जिन भक्तों की कुंडली मे अशुभ ग्रह होते है, वह ग्रह शांत होते है व शुभ फल प्राप्त होता है।  
  • प्रगति के अवसर प्राप्त होते है व अपने समाज मे मान-सम्मान बढ़ता है।
चालीसा shiv chalisaशिव चालीसा

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