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somvati amavasya
March 23, 2024July 17, 2025

सोमवती अमावस्या | Somvati Amavasya

सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते है। इसमे भगवान शिव माता पार्वती की पूजा की जाता है।

  • सोमवती अमावस्या साल में मात्र 1 या 2 बार ही पड़ता है।
  • साल 2024 में कुल 13 अमावस्या पड़ेंगी, जिसमे से 3 सोमवती अमावस्या है।
  • इस दिन किसी तीर्थस्थल पर स्नान आदि कर, अपने पूर्वजों को याद कर दान धर्म किया जाता है
  • सोमवती अमावस्या के दिन धान, हल्दी, सिंदूर, सुपड़ी को मिलाकर तुलसी को अर्पत करने का भी विधान है।
  • अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे घी का दीपक अवश्य जलाना चाहिए।
  • सोमवती अमावस्या के दिन तामसिक भोजन, माँस मदिरा का प्रयोग नहीं किया जाता है।

सोमवती अमावस्या कब है? 2024

पहली सोमवती अमावस्या

  • साल 2024 में पहली सोमवती अमावस्या 8 अप्रैल (सोमवार) को है
  • इस तिथि का आरंभ 8 अप्रैल को सुबह 03:21 पर होगा, और 8 अप्रैल की रात्री 11:50 तक रहेगा।
  • 8 अप्रैल को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या को चैत्र अमस्या कहा जाता है।  

दूसरी सोमवती अमावस्या

  • साल 2024 में दूसरी सोमवती अमावस्या 2 सितंबर को दिन सोमवार को पड़ेगा।
  • 2 सितंबर को पड़ने वाली अमावस्या भाद्रपद अमावस्या रहेगी।
  • दूसरी सोमवती अमावस्या की तिथि का आरंभ 2 सितंबर को प्रातःकाल 05:21 पर  होगा, और अगले दिन 3 सितंबर को प्रातःकाल 7:24 तक रहेगा।


तीसरी सोमवती अमावस्या

  • 2024 की तीसरी सोमवती अमावस्या 30 दिसंबर (सोमवार) को पड़ेगी।
  • 30 दिसंबर को पड़ने वाली अमावस्या पौष अमावस्या होगी।
  • तीसरी सोमवती अमावस्या तिथि का आरंभ 30 दिसंबर को सुबह 4:01 पर होगा, अगले दिन 31 दिसंबर को सुबह 3:56 तक रहेगा।

सोमवती अमावस्या पूजा विधि

  • प्रात्तः काल स्नान करे और स्वच्छ वस्त्र धारण् करे। 
  • इसके बाद भगवान शिव को गंगाजल से स्नान कराये।
  • अब घी का दीपक जलाए।
  • भगवान शिव का तिलक करे और उन्हे पुष्प अर्पित कराये।
  • माता पार्वती को शृंगार का समान चढ़ाए।
  • इसके बाद भगवान को भोग लगाए।
  • अंत में आरती करे।

सोमवती अमावस्या कथा | Somvati Amavasya Katha

प्राचीन काल में एक नगर में साहूकार अपने पत्नी व सात बेटे, बहुओ और एक बेटी के साथ रहा करते थे। उसी गाव में प्रतिदिन एक ब्राह्मण देव भिक्षा मांगने आते थे। जब भी ब्राह्मण देव साहूकार की बहु से भिक्षा लेता था, तो उन्हे आशीर्वाद देता की “अपने पति के कंधे राज करो”।

परंतु जब साहूकार की बेटी ब्राह्मण देव को भिक्षा देती, तो वो हमेशा उसे आशीर्वाद देते “तुम अपने भाई भाभी के कंधे पर राज करो”। साहूकार की बेटी को यह बात बुरी लगी, और उसने माँ को बोला की उसे ब्रह्मण देव ऐसा आशीर्वाद क्यों देते है।

तब साहूकार की पत्नी ने पुत्री को बोला, कल जब तुम भिक्षा दोगी तो मै ब्रह्मण देव से ऐसे आशीर्वाद देने का कारण पूछूँगी।  अगले दिन ब्राह्मण देव ने भिक्षा मांग, और भिक्षा देने साहूकर की पुत्री आई।

 साहूकार की पुत्री ने जैसे ही भिक्षा दिया, ब्राह्मण एव ने अशीर्वास दिया “तुम अपने भाई भाभी के कंधे राज करो”। तभी साहूकार की पत्नी आई और ऐसाआशीर्वाद देने का कारण पूछा। तब ब्राह्मण देव ने बोला, तुम्हारी पुत्री के जीवन में सुहाग का सुख नहीं है। इसीलिए मै ऐसा आशीर्वाद देता हूँ।

तब साहूकार की पत्नी ने बोला, की कृपया आप इसका कोई उपाय बताए। तब ब्राह्मण देव ने कहा अगर तुम्हरे बेटी की शादी में सोना धोबन आकर उसे आकार आशीर्वाद दे, तो इसका पति जीवित को नया जीवन मिल जाएगा। 

ब्रह्मण देव की बात सुनकर साहूकार की पति ने, अपने सभी पुत्रों से सोना धोबन के यहाँ जाने के लिए कहाँ पर कोई तैयार नहीं हुआ। लेकिन उसका सबसे छोटा पुत्र बहन के साथ सोना धोबन के यहाँ जाने को तैयार हो गया।

अगले दिन प्रातः काल होते ही, साहूकार का पुत्र व पुत्री सोना धोबन के यहाँ जाने के लिए निकल पड़े। रास्ते में जब चलते – चलते थक गए तो एक वृक्ष के नीचे बैठ गये।

तभी साहूकार के पुत्री की नजर वृक्ष पर पड़े घोंसले पर पड़ी। जिसमे कुछ नवजात बच्चे थे, और उसको काटने एक सर्प बढ़ रहा था। साहूकार की पुत्री ने एक पत्थर उठाया, और सर्प को मार दिया।

घोंसले में बच्चों को एक टोकरी से ढक दिया। तभी हंसिनी के जोड़े आ गए, उन्होंने देखा की वृक्ष के आस पास बहुत सारा खून पड़ा है, उन्होंने सोचाकी इन दो लोगों ने मेरे बच्चों को मार दिया है, और अपनी चोंच से दोनों भाई बहन को मारने लगी।

तभी साहूकार की पुत्री ने बोला, एक तो मैंने तुम्हरे बच्चों की जान बचाई ऊपर से मुझे ही मार रही हो। तब हंसिनी को अपने गलती का आहसास हुआ और उसने भाई बहन से माफी मांगी, और बोली की मै क्या सहायता कर सकती हूँ।   

तब साहूकार की बेटी ने बोला की हम सात समुदार पार सोना धोबन के पास जा रहे है, और क्या आप हमे वहाँ पहुच सकती ही। हंसिनी जोड़े ने भाई बहन को अपने ऊपर बैठा कर सोना धोबन के गाव में छोड़ दिया।

साहूकार के पुत्र तथा पुत्री वही गाव में रुक गए। अब प्रतिदिन साहूकार की पुत्री सोना धोबन के घर रात्री को जाती, और घर का सारा काम कर के उजाला होने से पहले ही चली आती।

एक दिन सोना धोबन ने अपने बहुओ से पूछा, अब तुम दोनों की लड़ाई की आवाज क्यू नहीं आती है सुबह – सुबह। तब बहुओ ने बोला माँ जी आप प्रतिदिन सुबह काम को कर देती है, इसलिए हम दोनों में लड़ाई नहीं होती।

तब सोना धोबन ने कहा मै तो कोई काम नहीं की, तो ये काम कोन करता है। सोना धोबन पता लगाने के लिए सोचने लगी, पता लगाया जाए की कौन है जो हमारे घर का काम चुपके से आकर करता है।

सोना धोबन रात्रि को जागी रही, और तभी साहूकार की पुत्री आई और काम करने लगी। तभी सोना धोबन ने रोका, और बोली की तुम क्यू हमारे घर का काम करती हो।

तभी साहूकार की पुत्री ने बोला, मेरे जीवन में सुहाग नहीं है, अगर आप मुझे अपने सोमवती अमावस्या व्रत का आशीर्वाद मुझे दे देंगी, तो मुझे भी सुहागन होने का सुख मिलेगा। 

तभी सोना धोबन ने कहा की जाओ जब तुमहरी शादी होगी, तो मुझे न्योता देना मै वहाँ आकर आशीर्वाद दूँगी।  अब भाई बहन दोनों वापस लौट आये अपने घर। कुछ दिनों बाद साहूकार की पुत्री की शादी तय हो गई, और सोना धोबन को न्योता दे दिया गया।

सोना धोबन जब आई तो सिंदूर दान हो रहा था, तभी दूल्हे को सर्प ने डंस लिया और वह वही बेहोश हो गया। तभी साहूकार की पुत्री को सोना धोबन ने सुहागन होने का आशीर्वाद दिया।

अब साहूकार की पुत्री भगवान को याद कर अपने पति के मुह में पानी डाला, पानी जैसे ही अंदर गया उसका पति उठ गया। वहाँ पर खड़े सभी लोगों ने ये चमत्कार देखकर, भगवान शिव माता पार्वती को याद कर धन्यवाद करने लगे। 

 महत्व

  • पवित्र नदी में स्नान करने से सभी पीड़ा नष्ट हो जाता है।
  • सोमवती अमावस्या करने से पित्रों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • इस दिन पूजा पाठ करने से घर में सुख शांति आती है।
  • भगवान शिव माता पार्वती का विशेष आशीर्वाद मिलता है। 
कथा व्रत Somvati Amavasya

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